पर्यावरण संरक्षण में भारत का बजा डंका: पीएम मोदी बोले- दुनिया को दिशा दिखा रहे; हाइड्रोजन ट्रेन का किया जिक्र

by · Amar Ujala

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' (पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य) विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लंबे समय से कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाली जाती रही है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि हकीकत यह है कि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। वहीं विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारतीयों की तुलना में छह गुना अधिक है। भारत इन तथ्यों को वैश्विक मंचों पर पूरी मजबूती से रखता है। उन्होंने हर भारतवासी से भी इस दिशा में आत्मविश्वास और दम दिखाने की बात कही।
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पीएम मोदी ने बताया कि भारत दुनिया के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के नए मानक तय कर रहा है। उन्होंने 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड', अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), सीडीआरआई, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन और 'मिशन लाइफ' जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये सभी मंच पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति भारत के समर्पण का प्रमाण हैं।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण के हर क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। भारत जी-20 का इकलौता ऐसा देश है, जिसने पेरिस में कॉप-21 (COP-21) सम्मेलन में किए गए अपने संकल्पों को समय सीमा से पहले पूरा करके दिखाया है। आज गैर-जीवाश्म ईंधन, सौर ऊर्जा क्षमता और कार्बन उत्सर्जन पर रोक जैसे मानकों पर भारत के प्रदर्शन की चर्चा पूरी दुनिया में है।

सौर ऊर्जा का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि 12 साल पहले देश की सौर क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो आज बढ़कर 160 गीगावाट के पार हो चुकी है। सरकार ने 'पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' के तहत घरों को सौर ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बनाने का मिशन शुरू किया। इस योजना के तहत अब तक 50 लाख से अधिक घरों में सोलर पैनल लग चुके हैं। यह संख्या कई देशों के कुल मकानों से भी अधिक है। सरकार ने ऐसे प्रत्येक परिवार को करीब 80,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है। हाल ही में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है, जो दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। यह स्वच्छ परिवहन के एक नए युग का आगाज है।

उन्होंने बताया कि बीते 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। हाइड्रो ऊर्जा क्षमता में भी मजबूत विस्तार हुआ है। इसके साथ ही देश अब परमाणु ऊर्जा उत्पादन पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों के लिए नए रास्ते खोले जा रहे हैं। इन प्रयासों के दम पर भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

परिवहन क्षेत्र में आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि साल 2014 से पहले देश में हर साल सिर्फ 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे। वहीं पिछले साल करीब 25 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं। इसके अलावा फास्टैग व्यवस्था लागू होने से टोल प्लाजा पर वाहनों का इंतजार घटा है और ईंधन की बर्बादी में भारी कमी आई है।


उन्होंने बताया कि 2014 से पहले केवल 5 शहरों में 250 किलोमीटर से कम का मेट्रो नेटवर्क था। आज देश के 20 शहरों में 1,000 किलोमीटर से अधिक लंबा मेट्रो नेटवर्क चालू है। साथ ही रेलवे के शत-प्रतिशत (100%) विद्युतीकरण से करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई है, जिससे पर्यावरण को सीधा फायदा मिला है।